संगरूर, (सुखविंदर सिंह बावा)- पत्रकारिता का उद्देश्य सच दिखाना है, लेकिन संगरूर के कुछ ‘सोशल मीडिया हीरो’ ने इस पवित्र पेशे को राजनीतिक पार्टियों के ‘PR सेल’ में बदल दिया है। लेकिन आज संगरूर में जो देखने को मिल रहा है, उसने इस पवित्र पेशे को शर्मसार कर दिया है।
राजनीतिक नेताओं का पार्टियां बदलना लोकतंत्र का हिस्सा है। BJP नेता का अकाली दल में शामिल होना खबर हो सकती है, लेकिन संगरूर के ‘तथाकथित पत्रकार’ के लिए यह शायद उनके अपने घर की शादी जैसा माहौल बन गया। जिस तरह एक पत्रकार ने सोशल मीडिया पर इस खबर को यह लिखकर पेश किया कि “संगरूर के लोगों को शादी जैसा उत्साह हुआ है,” यह पत्रकारिता के मुंह पर एक तमाचा है।
“आजकल एक नई तरह की पत्रकारिता शुरू हो गई है, ‘लिफाफा पत्रकारिता’। राजनीतिक नेता पार्टियां बदलते हैं, यह उनका काम है। अरविंद खन्ना जी अकाली दल में शामिल हुए, सुखबीर सिंह बादल ने उन्हें शामिल करवाया, यह राजनीतिक खबर है। लेकिन जब कोई पत्रकार अपने Facebook पर लिखता है कि ‘संगरूर के लोगों को शादी जैसी इच्छा हुई है’, तो उस पत्रकार से मेरा सवाल है, भाई, क्या यह ‘इच्छा’ लोगों को हुई है या नहीं……………..?”
“क्या पत्रकार अब राजनीतिक पार्टियों के ‘किराए के टट्टू’ बन गए हैं? क्या आपके कलम की स्याही अब किसी खास घर से आने वाले लिफाफों से चलती है? अगर आपको ‘शादी जैसी इच्छा’ इतनी ही है, तो पत्रकारिता छोड़ दो, अपना प्रेस कार्ड फेंक दो और उस पार्टी का झंडा थामकर ‘जिंदाबाद’ के नारे लगाओ। लेकिन जनता को गुमराह मत करो!”
ऐसे ‘लिफाफा पत्रकार’, जो पत्रकारिता की आड़ में राजनीतिक दलाली कर रहे हैं, उन्हें अब सावधान हो जाना चाहिए। संगरूर के लोग बेवकूफ नहीं हैं। आपकी ऐसी ‘प्रमोशनल पोस्ट’ दिखाती हैं कि आपकी अंतरात्मा कितनी बिक चुकी है। ‘संगरूरनामा’ ऐसे पत्रकारों की कुंडली खोलेगा, जो जनता को गुमराह करके अपने राजनीतिक आकाओं के तलवे चाट रहा है।
“हम ‘संगरूरनामा’ के ज़रिए ऐसे हर ‘चमचा पत्रकार’ का पर्दाफाश करेंगे। हम रिपोर्टिंग करेंगे, लेकिन किसी के लिए दलाली नहीं करेंगे। हमारी कलम सिर्फ जनता के मुद्दों के लिए चलेगी, किसी की ‘शादी जैसी इच्छाओं’ के लिए नहीं।” संगरूर के लोगों, ऐसे पत्रकारों से सावधान रहें जो ख़बरें नहीं, बल्कि ‘राजनीतिक प्रोपेगैंडा’ परोस रहे हैं।
मेरा शहर, मेरी आवाज़ – संगरूरनामा।
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“संगरूरनामा की पैनी नज़र के सामने, भ्रष्टाचारी बेअसर हो जाएंगे!”
(अब आपके शहर की आवाज़, आपके हाथों में!)-
संगरूरनामा एक दैनिक सांध्य समाचार पत्र के रूप में आपकी सेवा में हाज़िर होने जा रहा है।
शुभारंभ: 23 मार्च 2026 | भाषा: पंजाबी, हिंदी और अंग्रेज़ी
संगरूरनामा – मेरा शहर, मेरी आवाज़! 📩



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