संगरूर/लुधियाना (सुखविंदर सिंह): पंजाब में ह्यूमन राइट्स की सुरक्षा के लिए एक बड़ी मिसाल कायम करते हुए, पंजाब स्टेट ह्यूमन राइट्स कमीशन (PSHRC) ने लुधियाना के एक प्राइवेट अस्पताल की मनमानी पर रोक लगा दी है। कमीशन ने एक लाश को तुरंत छोड़ने का आदेश दिया है, जिसे अस्पताल ने 6 लाख रुपये के बकाया बिल के कारण रोक रखा था। इस फैसले से पूरे राज्य में यह चर्चा शुरू हो गई है कि इंसानियत व्यापार से ऊपर है।
क्या है पूरा मामला?
एक गरीब परिवार, जो अपने सदस्य के इलाज के लिए 6 लाख रुपये का भारी बिल नहीं चुका पा रहा था, उसे अस्पताल ने लाश देने से मना कर दिया। कमीशन ने इसे भारतीय संविधान के आर्टिकल 21 (सम्मान के साथ जीने और मरने का अधिकार) का उल्लंघन मानते हुए एक ऐतिहासिक कदम उठाया।
“यह इंसानी सम्मान की एक बड़ी जीत है” – जतिंदर कालरा

मशहूर सामाजिक विचारक जतिंदर कालरा ने कमीशन के इस बड़े कदम का जोरदार स्वागत किया है। उन्होंने कहा, “मैं कमीशन के इस फैसले को सलाम करता हूं। अस्पतालों को समझना चाहिए कि वे कानून से ऊपर नहीं हैं। लाश को रखना इंसानियत के खिलाफ जुर्म है। सरकार को अब सभी अस्पतालों के लिए सख्त गाइडलाइंस जारी करनी चाहिए ताकि भविष्य में किसी और गरीब के साथ ऐसा न हो।”
फैसले की 4 बड़ी बातें:
लाश कोई ‘वस्तु’ नहीं: कमीशन ने साफ किया कि पैसे वसूलने के लिए किसी की लाश को बंधक बनाना गैर-कानूनी और क्रिमिनल काम है।
अस्पतालों में गुंडागर्दी पर रोक: यह फैसला उन अस्पतालों के लिए एक बड़ा सबक है जो गरीबों की मजबूरी का फायदा उठाते हैं।
पंजाब में ऐसा पहला मामला: कमीशन के मुताबिक, पंजाब में यह पहला मामला है जहां सीधे दखल से किसी लाश को छुड़ाया गया है।
गरीबों के लिए उम्मीद की किरण: यह साबित हो गया है कि कानून सिर्फ अमीरों के लिए ही नहीं, बल्कि दबे-कुचले लोगों के लिए भी ढाल है।
“अगर आपके इलाके में कोई समस्या है, तो हमें इस नंबर [90566 64887] पर फ़ोटो या वीडियो भेजें, हम आपकी आवाज़ बनेंगे।”
#Sangrur #KaulanPark #PublicHealth #NagarCouncil #Sangrurnama #MeraSheharMeriAwaz #PunjabNews #jatinderKalra #SukhwinderSinghBawa



